Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 64.5

सा व॑ह॒ योक्षभि॒रवा॒तोषो॒ वरं॒ वह॑सि॒ जोष॒मनु॑ ।
त्वं दि॑वो दुहित॒र्या ह॑ दे॒वी पू॒र्वहू॑तौ मं॒हना॑ दर्श॒ता भू॑ः ॥५॥

पूरा अध्याय