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ऋग्वेद 64.4

सु॒गोत ते॑ सु॒पथा॒ पर्व॑तेष्ववा॒ते अ॒पस्त॑रसि स्वभानो ।
सा न॒ आ व॑ह पृथुयामन्नृष्वे र॒यिं दि॑वो दुहितरिष॒यध्यै॑ ॥४॥

पूरा अध्याय