ग्रंथऋग्वेदमण्डल 6सूक्त 6161.5ऋग्वेद 61.5यस्त्वा॑ देवि सरस्वत्युपब्रू॒ते धने॑ हि॒ते । इन्द्रं॒ न वृ॑त्र॒तूर्ये॑ ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय