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ऋग्वेद 48.5

यमापो॒ अद्र॑यो॒ वना॒ गर्भ॑मृ॒तस्य॒ पिप्र॑ति । सह॑सा॒ यो म॑थि॒तो जाय॑ते॒ नृभि॑ः पृथि॒व्या अधि॒ सान॑वि ॥५॥

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