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ऋग्वेद 48.4

म॒हो दे॒वान्यज॑सि॒ यक्ष्या॑नु॒षक्तव॒ क्रत्वो॒त दं॒सना॑ । अ॒र्वाच॑ः सीं कृणुह्य॒ग्नेऽव॑से॒ रास्व॒ वाजो॒त वं॑स्व ॥४॥

पूरा अध्याय