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ऋग्वेद 45.18

धि॒ष्व वज्रं॒ गभ॑स्त्यो रक्षो॒हत्या॑य वज्रिवः । सा॒स॒ही॒ष्ठा अ॒भि स्पृध॑ः ॥१८॥

पूरा अध्याय