ग्रंथऋग्वेदमण्डल 6सूक्त 4545.17ऋग्वेद 45.17यो गृ॑ण॒तामिदासि॑था॒ऽऽपिरू॒ती शि॒वः सखा॑ । स त्वं न॑ इन्द्र मृळय ॥१७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय