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ऋग्वेद 75.2

अ॒त्याया॑तमश्विना ति॒रो विश्वा॑ अ॒हं सना॑ ।
दस्रा॒ हिर॑ण्यवर्तनी॒ सुषु॑म्ना॒ सिन्धु॑वाहसा॒ माध्वी॒ मम॑ श्रुतं॒ हव॑म् ॥२॥

पूरा अध्याय