ग्रंथऋग्वेदमण्डल 5सूक्त 5151.3ऋग्वेद 51.3विप्रे॑भिर्विप्र सन्त्य प्रात॒र्याव॑भि॒रा ग॑हि । दे॒वेभि॒ः सोम॑पीतये ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय