ग्रंथऋग्वेदमण्डल 5सूक्त 5151.2ऋग्वेद 51.2ऋत॑धीतय॒ आ ग॑त॒ सत्य॑धर्माणो अध्व॒रम् । अ॒ग्नेः पि॑बत जि॒ह्वया॑ ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय