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ऋग्वेद 51.14

स्व॒स्ति मि॑त्रावरुणा स्व॒स्ति प॑थ्ये रेवति ।
स्व॒स्ति न॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॑ स्व॒स्ति नो॑ अदिते कृधि ॥१४॥

पूरा अध्याय