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ऋग्वेद 35.3

आ तेऽवो॒ वरे॑ण्यं॒ वृष॑न्तमस्य हूमहे ।
वृष॑जूति॒र्हि ज॑ज्ञि॒ष आ॒भूभि॑रिन्द्र तु॒र्वणि॑ः ॥३॥

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