ग्रंथऋग्वेदमण्डल 4सूक्त 1515.2ऋग्वेद 15.2परि॑ त्रिवि॒ष्ट्य॑ध्व॒रं यात्य॒ग्नी र॒थीरि॑व । आ दे॒वेषु॒ प्रयो॒ दध॑त् ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय