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ऋग्वेद 59.7

पुन॑र्नो॒ असुं॑ पृथि॒वी द॑दातु॒ पुन॒र्द्यौर्दे॒वी पुन॑र॒न्तरि॑क्षम् ।
पुन॑र्न॒ः सोम॑स्त॒न्वं॑ ददातु॒ पुन॑ः पू॒षा प॒थ्यां॒३ या स्व॒स्तिः ॥७॥

पूरा अध्याय