ग्रंथऋग्वेदमण्डल 10सूक्त 5858.7ऋग्वेद 58.7यत्ते॑ अ॒पो यदोष॑धी॒र्मनो॑ ज॒गाम॑ दूर॒कम् । तत्त॒ आ व॑र्तयामसी॒ह क्षया॑य जी॒वसे॑ ॥७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय