ग्रंथऋग्वेदमण्डल 10सूक्त 5858.6ऋग्वेद 58.6यत्ते॒ मरी॑चीः प्र॒वतो॒ मनो॑ ज॒गाम॑ दूर॒कम् । तत्त॒ आ व॑र्तयामसी॒ह क्षया॑य जी॒वसे॑ ॥६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय