ग्रंथऋग्वेदमण्डल 10सूक्त 5858.4ऋग्वेद 58.4यत्ते॒ चत॑स्रः प्र॒दिशो॒ मनो॑ ज॒गाम॑ दूर॒कम् । तत्त॒ आ व॑र्तयामसी॒ह क्षया॑य जी॒वसे॑ ॥४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय