ग्रंथऋग्वेदमण्डल 10सूक्त 5858.12ऋग्वेद 58.12यत्ते॑ भू॒तं च॒ भव्यं॑ च॒ मनो॑ ज॒गाम॑ दूर॒कम् । तत्त॒ आ व॑र्तयामसी॒ह क्षया॑य जी॒वसे॑ ॥१२॥पिछलापूरा अध्याय