ग्रंथऋग्वेदमण्डल 10सूक्त 186186.2ऋग्वेद 186.2उ॒त वा॑त पि॒तासि॑ न उ॒त भ्रातो॒त न॒ः सखा॑ । स नो॑ जी॒वात॑वे कृधि ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय