ग्रंथऋग्वेदमण्डल 10सूक्त 186186.1ऋग्वेद 186.1वात॒ आ वा॑तु भेष॒जं श॒म्भु म॑यो॒भु नो॑ हृ॒दे । प्र ण॒ आयूं॑षि तारिषत् ॥१॥अगलापूरा अध्याय