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ऋग्वेद 183.2

अप॑श्यं त्वा॒ मन॑सा॒ दीध्या॑नां॒ स्वायां॑ त॒नू ऋत्व्ये॒ नाध॑मानाम् ।
उप॒ मामु॒च्चा यु॑व॒तिर्ब॑भूया॒ः प्र जा॑यस्व प्र॒जया॑ पुत्रकामे ॥२॥

पूरा अध्याय