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ऋग्वेद 183.1

अप॑श्यं त्वा॒ मन॑सा॒ चेकि॑तानं॒ तप॑सो जा॒तं तप॑सो॒ विभू॑तम् ।
इ॒ह प्र॒जामि॒ह र॒यिं ररा॑ण॒ः प्र जा॑यस्व प्र॒जया॑ पुत्रकाम ॥१॥

पूरा अध्याय