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ऋग्वेद 174.3

अ॒भि त्वा॑ दे॒वः स॑वि॒ताऽभि सोमो॑ अवीवृतत् । अ॒भि त्वा॒ विश्वा॑ भू॒तान्य॑भीव॒र्तो यथास॑सि ॥३॥

पूरा अध्याय