Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 158.2

जोषा॑ सवित॒र्यस्य॑ ते॒ हर॑ः श॒तं स॒वाँ अर्ह॑ति । पा॒हि नो॑ दि॒द्युत॒ः पत॑न्त्याः ॥२॥

पूरा अध्याय