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ऋग्वेद 145.5

अ॒हम॑स्मि॒ सह॑मा॒नाऽथ॒ त्वम॑सि सास॒हिः । उ॒भे सह॑स्वती भू॒त्वी स॒पत्नीं॑ मे सहावहै ॥५॥

पूरा अध्याय