ग्रंथऋग्वेदमण्डल 1सूक्त 8282.2ऋग्वेद 82.2अक्ष॒न्नमी॑मदन्त॒ ह्यव॑ प्रि॒या अ॑धूषत । अस्तो॑षत॒ स्वभा॑नवो॒ विप्रा॒ नवि॑ष्ठया म॒ती योजा॒ न्वि॑न्द्र ते॒ हरी॑ ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय