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ऋग्वेद 82.1

उपो॒ षु शृ॑णु॒ही गिरो॒ मघ॑व॒न् मात॑था इव ।
य॒दा न॑ः सू॒नृता॑वत॒ः कर॒ आद॒र्थया॑स॒ इद् योजा॒ न्वि॑न्द्र ते॒ हरी॑ ॥१॥

पूरा अध्याय