ग्रंथऋग्वेदमण्डल 1सूक्त 88.2ऋग्वेद 8.2नि येन॑ मुष्टिह॒त्यया॒ नि वृ॒त्रा रु॒णधा॑महै। त्वोता॑सो॒ न्यर्व॑ता ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय