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ऋग्वेद 67.4

य ईं॑ चि॒केत॒, गुहा॒ भव॑न्त॒मा यः स॒साद॒ धारा॑मृ॒तस्य॑ ७
वि ये चृ॒तन्त्यृ॒ता सप॑न्त॒ आदिद् वसू॑नि॒ प्र व॑वाचास्मै ॥४॥

पूरा अध्याय