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ऋग्वेद 66.5

तं व॑श्च॒राथा॑, व॒यं व॑स॒त्यास्तं॒ न गावो॒, नक्ष॑न्त इ॒द्धम् ९
सिन्धु॒र्न क्षोद॒ः, प्र नीची॑रैनो॒न्नव॑न्त॒ गाव॒ः, स्व १ र्दृशी॑के ॥५॥

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