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ऋग्वेद 66.4

सेने॑व सृ॒ष्टामं॑ दधा॒त्यस्तु॒र्न दि॒द्युत्, त्वे॒षप्र॑तीका ७
य॒मो ह॑ जा॒तो, य॒मो जनि॑त्वं जा॒रः क॒नीनां॒, पति॒र्जनी॑नाम् ॥४॥

पूरा अध्याय