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ऋग्वेद 36.15

पा॒हि नो॑ अग्ने र॒क्षस॑ः पा॒हि धू॒र्तेररा॑व्णः ।
पा॒हि रीष॑त उ॒त वा॒ जिघां॑सतो॒ बृह॑द्भानो॒ यवि॑ष्ठ्य ॥१५॥

पूरा अध्याय