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ऋग्वेद 36.14

ऊ॒र्ध्वो न॑ः पा॒ह्यंह॑सो॒ नि के॒तुना॒ विश्वं॒ सम॒त्रिणं॑ दह ।
कृ॒धी न॑ ऊ॒र्ध्वाञ्च॒रथा॑य जी॒वसे॑ वि॒दा दे॒वेषु॑ नो॒ दुव॑ः ॥१४॥

पूरा अध्याय