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ऋग्वेद 175.2

आ न॑स्ते गन्तु मत्स॒रो वृषा॒ मदो॒ वरे॑ण्यः । स॒हावाँ॑ इन्द्र सान॒सिः पृ॑तना॒षाळम॑र्त्यः ॥२॥

पूरा अध्याय