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ऋग्वेद 124.5

पूर्वे॒ अर्धे॒ रज॑सो अ॒प्त्यस्य॒ गवां॒ जनि॑त्र्यकृत॒ प्र के॒तुम् ।
व्यु॑ प्रथते वित॒रं वरी॑य॒ ओभा पृ॒णन्ती॑ पि॒त्रोरु॒पस्था॑ ॥५॥

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