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ऋग्वेद 124.4

उपो॑ अदर्शि शु॒न्ध्युवो॒ न वक्षो॑ नो॒धा इ॑वा॒विर॑कृत प्रि॒याणि॑ ।
अ॒द्म॒सन्न स॑स॒तो बो॒धय॑न्ती शश्वत्त॒मागा॒त् पुन॑रे॒युषी॑णाम् ॥४॥

पूरा अध्याय