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ऋग्वेद 11.4

पु॒रां भि॒न्दुर्युवा॑ क॒विरमि॑तौजा अजायत ।
इन्द्रो॒ विश्व॑स्य॒ कर्म॑णो ध॒र्ता व॒ज्री पु॑रुष्टु॒तः ॥४॥

पूरा अध्याय