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श्रीरामचरितमानस 98.3

भए लोग सब मोहबस लोभ ग्रसे सुभ कर्म।
सुनु हरिजान ग्यान निधि कहउँ कछुक कलिधर्म ॥97(ख)॥

पूरा अध्याय