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श्रीरामचरितमानस 98.2

कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त भए सदग्रंथ।
दंभिन्ह निज मति कल्पि करि प्रगट किए बहु पंथ ॥97(क)॥

पूरा अध्याय