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श्रीरामचरितमानस 97.3

पूरुब कल्प एक प्रभु जुग कलिजुग मल मूल।।
नर अरु नारि अधर्म रत सकल निगम प्रतिकूल ॥96(ख)॥

पूरा अध्याय