ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 9494.3श्रीरामचरितमानस 94.3प्रभु अपने अबिबेक ते बूझउँ स्वामी तोहि। कृपासिंधु सादर कहहु जानि दास निज मोहि ॥93(ख)॥पिछलापूरा अध्याय