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श्रीरामचरितमानस 94.2

ताहि प्रसंसि बिबिध बिधि सीस नाइ कर जोरि।
बचन बिनीत सप्रेम मृदु बोलेउ गरुड़ बहोरि ॥93(क)॥

पूरा अध्याय