ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 9292.3श्रीरामचरितमानस 92.3काल कोटि सत सरिस अति दुस्तर दुर्ग दुरंत। धूमकेतु सत कोटि सम दुराधरष भगवंत ॥91(ख)॥पिछलापूरा अध्याय