ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 9191.2श्रीरामचरितमानस 91.2बिनु बिस्वास भगति नहिं तेहि बिनु द्रवहिं न रामु। राम कृपा बिनु सपनेहुँ जीव न लह बिश्रामु ॥90(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय