ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 8585.3श्रीरामचरितमानस 85.3भगत कल्पतरु प्रनत हित कृपा सिंधु सुख धाम। सोइ निज भगति मोहि प्रभु देहु दया करि राम ॥84(ख)॥पिछलापूरा अध्याय