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श्रीरामचरितमानस 85.2

अबिरल भगति बिसुध्द तव श्रुति पुरान जो गाव।
जेहि खोजत जोगीस मुनि प्रभु प्रसाद कोउ पाव ॥84(क)॥

पूरा अध्याय