ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 8383.2श्रीरामचरितमानस 83.2देखि कृपाल बिकल मोहि बिहँसे तब रघुबीर। बिहँसतहीं मुख बाहेर आयउँ सुनु मतिधीर ॥82(क)॥पिछलाअगलापूरा अध्याय