ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 8181.3श्रीरामचरितमानस 81.3एक एक ब्रह्मांड महुँ रहउँ बरष सत एक। एहि बिधि देखत फिरउँ मैं अंड कटाह अनेक ॥80(ख)॥पिछलापूरा अध्याय