ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 7979.3श्रीरामचरितमानस 79.3राकापति षोड़स उअहिं तारागन समुदाइ।। सकल गिरिन्ह दव लाइअ बिनु रबि राति न जाइ ॥78(ख)॥पिछलापूरा अध्याय