ग्रंथश्रीरामचरितमानसउत्तरकाण्डदोहा 6464.3श्रीरामचरितमानस 64.3सदा कृतारथ रूप तुम्ह कह मृदु बचन खगेस। जेहि कै अस्तुति सादर निज मुख कीन्हि महेस ॥63(ख)॥पिछलापूरा अध्याय